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24 December 2015

हिन्दू पंचांग क्या है आैर कैसे बना


हिन्दू पंचांग हिन्दू धर्म द्वारा माने जाने वाला कैलेंडर है। इसके भिन्न-भिन्न रूप मे यह लगभग पूरे नेपाल और भारत मे माना जाता है। 

पंचांग का अर्थ - पंच + अंग = पांच अंग।

पंचांग नाम पाँच प्रमुख भागों से बने होने के कारण है 
1. तिथि   2.वार   3.नक्षत्र   4.योग  और  5. करण। 

इसकी गणना के आधार पर हिंदू पंचांग की तीन धाराएँ हैं - 
पहली चंद्र आधारित, 
दूसरी नक्षत्र आधारित और 
तीसरी सूर्य आधारित कैलेंडर पद्धति। 

एक साल में १२ महीने होते हैं।  प्रत्येक महीने में १५ दिन के दो पक्ष होते हैं - शुक्ल और कृष्ण। 

प्रत्येक साल में दो अयन होते हैं। इन दो अयनों की राशियों में २७ नक्षत्र भ्रमण करते रहते हैं। १२ मास का एक वर्ष  और  ७ दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत से शुरू हुआ। 

महीने का हिसाब सूर्य व चंद्रमा की गति पैर रखा जाता है। यह १२ राशियाँ बारह सौर मास हैं। जिस दिन सूर्य जिस राशि मे प्रवेश करता है उसी दिन की संक्रांति होती है। 

हर 3वर्ष में एक महीना क्यों जोडा जाता है -
चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से ११ दिन ३ घड़ी ४८ पल छोटा है। इसीलिए हर ३ वर्ष मे इसमे एक महीना जोड़ दिया जाता है जिसे अधिक मास कहते हैं।

महीनो का नामकरण कैसे हुआ -
पूर्णिमा के दिन चंद्रमा जिस नक्षत्र मे होता है उसी आधार पर महीनों का नामकरण हुआ है।

तिथि क्या है -
एक दिन को तिथि कहा गया है जो पंचांग के आधार पर उन्नीस घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक की होती है। 
चंद्र मास में ३० तिथियाँ होती हैं, जो दो पक्षों में बँटी हैं- 
शुक्ल पक्ष में एक से चौदह और फिर पूर्णिमा आती है। पूर्णिमा सहित कुल मिलाकर पंद्रह तिथि। कृष्ण पक्ष में एक से चौदह और फिर अमावस्या आती है। अमावस्या सहित पंद्रह तिथि।

तिथियों के नाम निम्न हैं-  
पूर्णिमा (पूरनमासी), प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी (चौथ), पंचमी (पंचमी), षष्ठी (छठ), सप्तमी (सातम), अष्टमी (आठम), नवमी (नौमी), दशमी (दसम), एकादशी (ग्यारस), द्वादशी (बारस), त्रयोदशी (तेरस), चतुर्दशी (चौदस) और अमावस्या (अमावस)।


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