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25 March 2015

गांधी के बारे में सोच

स्कूल में छोटी कक्षा में पढाया गया की गाँधी एक महात्मा थे जिन्होंने हमारे देश को आजाद करवायाए जब असलियत पता चली तो सामने आया वो सब झूठ था।  शिक्षा के पाठ्यक्रम में ऐसा क्यों दिया गया है जो साक्षात् शत प्रतिशत झूठ है, छात्र अपने जीवन की शुरुवात झूठ से करेगा तो क्या भविष्य होगा। 
गांधी के जीवन के क्रियाकलापों के बारे में अगर गहराई से अध्ययन कीया जाए तो इसे राष्ट्र पिता क्या इंसान भी नहीं कहा जा सकता। गाँधी वध करने वाले नाथूराम गोडसे एक महान क्रांतिकारी थे आैर सच्चे देश भक्त थे।
गांधी वध के मुकद्दमें के दौरान न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर सुनाने की अनुमति माँगी थी,  और उसे यह अनुमति मिली थी।  नाथूराम गोडसे का यह न्यायालयीन वक्तव्य भारत सरकार द्वारा प्रतिबन्धित कर दिया गया था।

इसे प्रतिबन्धित क्यों किया गया ? आप ही सोचे ...... क्या डर था सरकार को ..............

इस प्रतिबन्ध के विरुद्ध नाथूराम गोडसे के भाई तथा गांधी वध के सह अभियुक्त गोपाल गोडसे ने ६० वर्षों तक वैधानिक लडाई लड़ी और उसके फलस्वरूप सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रतिबन्ध को हटा लिया।

कई इतिहासारो का मत है की गांधी एक बहुत बड़ा तानाशाह था। वह बंदूकों से नहीं लड़ता था उसके हथियार मक्कारी, ढोंग, और हर उस व्यक्ति को कुचल देने का षड्यन्त्र करना था जो कभी उससे ज्यादा प्रसिद्धि पाता दिखता था। ये हमेशा अपने नाम के लिए मरता रहा।   इसकी सोच देश के लिए नहीं बल्कि खुद को सर्वश्रेष्ठ दिखाने की थी।  मेरे आैर अन्यों के विचार में गांधी  एेसा काला नाग था जिसने देश के टुकडे कर दिये। वह देशभक्त नहीं देश द्रोही था अंग्रजी हुकुमत का गुलाम था।

गांधी ने अपनी पढाई विदेश में पूरी की थी। हर जगह उसे असफलता मिली । असफल होने के बाद नेता-गिरी में आया। अपनी पहचान बनाने के लिए उसने अखबार का सहारा लिया था। आैर बाद में उसने अपने अखबार का प्रकाशन भी करवाया। लेकिन वह अखबार ज्यादा नहीं चले।

इतिहासकारों के मुताबकि :  गाँधी कभी नहीं चाहाता था कि हिंसक क्रांति कारी आंदोलन की ताकत बढे आैर भगत सिंह को इतनी लोकप्रियता मिले। क्योंकि गांधी इस आंदोलन को रोक नहीं सकता था। यह उसके वश में नहीं था। इस मामले में गाँधी आैर ब्रिटिश हुकूमत के हित एक जैसे थे। दोनो इस आंदोलन को प्रभावी नहीं होने देना चाहते थे।


नेताजी सुभाष जी ने गांधी की तुलना हिटलर , मुसोलिनी और लेनिन जैसे तानाशाह नेताओं से की थी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस से प्रकाशित नेताजी की पुस्तक श् द इंडियन स्ट्रगल 1920 - 1942  में उन्होंने लिखा कि गांधी ने जनता की मनोभावना का ठीक वैसे ही दोहन किया,  जैसे रूस में लेलिन ए जर्मनी में हिटलर और इटली में मुसोलिनी ने किया था ।

गाँधी  ने देश को आजाद नही कराया बल्की सच ये है एक टुकड़ा काट कर पाकिस्तान बना दिया भला हो गोड़से जी का जिन्होने गांधी का संहार कर के और टुकड़े होने से बचा लिया। 

अब आप खुद ही सोचे की माहत्मा की पदवी का असली हकदार कौन होना चाहिये आैर कौन नहीं ?





                                                                                                पढे  


                                                           भगत सिंह ,    सुख देव  ,   राजगुरु

                                                              नाथूराम गोडसे



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