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04 March 2015

आतंकवाद का जन्मदाता

आतंकवाद का जन्मदाता हमारा पडोसी मुल्क पाकिस्तान है यह जग जाहीर है। वर्षो से हमारा देश आतांकवाद से ग्रस्त है आतंकी घटनाओं में ना जाने कितने निर्दोष नागरिक काल के गाल में समा गये, सेना के हजारों जवान शहीद हो गये।

आखिर कब तक चलता रहेगा ये सब ? 
क्या ऐसा कोई रास्ता या तरीका नहीं है कि हमें आतंकवाद से मुक्ति मिल सके ? 

’’ मागनें पर हिन्दुस्तान ने अपने कलेजे का टुकडा काटकर दे दिया ’’  वो भी स्वार्थ में आकर और अंग्रेज भक्त लोगो की वजह से और गुजर-बसर के लिए छप्पन करोड रुपये भी पाकिस्तान की वादा-खिलाफी करने के बाद भी दिये जिसका विरोघ भी हुआ था,  वो भी मंदी के उस दौर में,  आज के दौर से यदि उसका मूल्यांकन किया जावे तो लगभग छप्पन अरब रुपये होते है।

हमारी दी जमीन और हमारे ही दिये रुपयों के दम पर अपने सपनों की दुनिया बसाई। हमारा यह अहसान मानना चाहिये परन्तु यह तो उनकी फितरत में ही नहीं था यह इतिहास भी बतलाता है।  बहुत बडे अहसान फरामोश निकले- 
सोचना चाहिये था की जो अपने वतन को अपने सवार्थ के लिए दो टुकडे करने को तैयार हो गये उन पर क्या भरोसा किया जा सकता था।  हमने इतिहास से भी सबक नहीं लिया यह सब उसका नतीजा है।  हमी से खार खाते है हमारी तरक्की से यू ही जलते-भुनते है जैसे कोई औरत अपनी सौतन से जलती फुंकती है।

कई बार जंग छेडी और हर बार मुंह की खाई। शिकस्त खाने पर शर्मिन्दा होने की बजाय बडी ही बेशर्मी के साथ फिर जंग छेडी और फिर बुरी तरह पिटे। बार-बार पिटने का कडवा घूंट भरने के बाद भी नकटो की तरह से जी रहे है। जब लगा की आमने-सामने की जंग में हमारे साथ नहीं टिक पायेगे तो आई0 एस0 आई0 नाम की संस्था का गठन कर दिया जो कि आज दुनिया भर में बदनाम है। 
यह पाकिस्तान की एक गुप्तचर संस्था है - हकीकत में आई0 एस0 आई0 दूसरे मुल्कों खास करके हिन्दुस्तान में गड़बडी फेलाने का माध्यम मात्र है। 
आई0एस0आई  अपने एजेंटो और ओहदेदारों के जरीये तो हमारे मुल्क में गडबडी कराती ही है, और विभन्न आतंकी संगठनो के सरपरस्त बन करके उनके जरिये मौत का खेल खिलाती रहती है। जगह-जगह बम-गोलाबारी कर निर्दोषों का खून बहाया जा रहा है। बेरोजगारो और राह से भटके लोगों को बहला-फुसलाकर पाकिस्तान भिजवाकर ट्रेनिंग दी जाती है और फिर उनके हाथों में बम और हथियार दे दिये जाते है। और वो सिरफिरे अलग मुल्क, जिहाद या दौलत के लालच में अपनों का ही खून बहाते है।

कभी अलग मुल्क की मांग पर पंजाब कभी कशमीर में धमाके किये जाते है। कशमीर की वादियों में केसर की क्यारियों में आतंकवाद क फसल बोई जाती है चिनार के पेडो तले लाशें बिछाई जाती है। डल झील के पानी में निर्दोषों का खून मिला दिया जाता है। फूलों की वादियों में इंसानियत की कब्रें खोदी जा रही है, मस्जिदों में हथियारों और धमाकों की अजान कर रहे है।

अब समूचे मुल्क में ही दहशत का माहौल है। कोई भी जगह आतंकवाद से अछूता नहीं रह गया है। कभी दिल्ली कभी जयपुर कभी अहमदाबाद तो कभी बम्बई में सीरियल ब्लास्ट हो रहे है। धमाके - खून - लाशे - चीखो पुकार - रुंदन विलाप करते मां-बाप भाई-बहन मातम बनाती सुहागिनें अपनी मांग के सिन्दूर में आंसू मिलाकर होली खेलने को मजबूर है, रोते-बिलखते अनाथ कर दिये गए मासूम इस आतंकवाद के पीछे आई0एस0आइ0 को और आई0एस0आइ0 के पीछे पाकिस्तान के हुक्मरानों का और हुक्मरानो के पीछे कट्टरपंथियों और वहां के मिलिट्री अफसरों का हाथ है। कुल मिलाकर पूरा पाकिस्तान ही इस आतंकवाद के लिये जिम्मेदासर है। और ये भी सच है कि पाकिस्तान की पीठ ठोंकने वाले उसकी परोख रुप से मदद करने वाले कुछ बडे मुल्क है। जो कि हिन्दुस्तान की तरक्की और बढती ताकत से परेशान है।

पहले अमेरिका और ब्रिटेन  जैसे मुल्क भी चोरी छिपे पाकिस्तान की मदद करते थे, धन मुहैया करते थे और हथियार भी देते थे लेकिन जब से ब्रिटेन और अमेरिका में आतंकी हमले हुये तो दोनो मददगारों की आंखे खुली क्योंकि आतंकी घटनाओं के तार पाकिस्तान से जुडते नजर आ रहे थे। दोनो को इस बात का अहसास हुआ कि भले ही नाग को दूध पिलाते रहो लेकिन वो डसने से बाज नहीं आयेगा जिसकी आस्तीन में पलेगा उसी को डसेगा। 

लेकिन अब चीन अभी भी पाकिस्तान की मदद कर रहा है। आतंकियों के पास से बरामद होने वाल हथियार इस बात का सबूत है जिस दिन चीन में आतंकी बारदात हो जायेगी उसी दिन वो भी खूंट में आ जायेगा। सिर पकडकर अपनी गलतियों पर पछतायेगा। 

अब एक छोटा पिद्दी सा मुल्क बांग्लादेश भी गडबडी करने लगा है। वहां पर भी आतंकी पैदा हो रहे है और पाकिस्तान की राह पर हमारे मुल्क में गडबडी कर रहे है। पाकिस्तान का पिटठू बनकर बांग्लादेश हमारे खिलाफ चोरी-छिपे गडबडी तो कर रहा है - लेकिन वो यह भूल रहा है कि उसका जन्मदाता हिन्दुस्तान ही है। और जो अपने जन्मदाता के साथ कर रहा है उस पर क्या भरोसा किया जा सकता है।
जब बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ था तो वहां के बाशिन्दे गुलामों से भी बदतर जिन्दगी जी रहे थे। पाकिस्तान की सरकार उनके साथ सौतेला व्यवहार कर ही थी। पाकिस्तान की मिलट्री तो बांग्लादेषियों पर जुल्म ढा रही थी। इतने जुल्म तो फिरगियों ने भी हम पर नहीं किये थे जितना पाकिस्तानी फौजी बांग्लादेशीयों पर बरपाा रहे थे। बगावत की आंधी उठी बांग्लादेश आजादी के वास्ते पंख फडफडाने लगा। उसका नामों-’निशान ही मिट गया होता, अगर हिन्दुस्तान ने उसकी मदद ना की होती।

हिन्दुस्तान की मिलट्री ने बांग्लादेश में जाकर पाक की मिलट्री से जंग लडी। पाकिस्तानियों की अक्ल ठिकाने लगा दी - उनके छक्के छुडा दिये।  बुरी तरह से पिटने पर पाकिस्तानी फौज ने हथियार डालकर सरंडर कर दिया था - धुटनो के बल बैठ गये थे। बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। खाने-पीने के लाले पडे हुये थे, तब हिन्दुस्तान ने मदद की थी।  
सिनेमा, बस, ट्रेन की टिकटो पर दस पैसे एक्स्ट्रा यहा की जनता से लिये और बांग्लादेश को मोटी रकम भेजी। कपडे-दवाईया और अन्य आवशयक सामग्री भी भेजी गई थी। जिन बांग्लादेशियों को रोम-रोम हिन्दुस्तान के अहसानों से बिंधा हुआ है आज वो ही हिन्दुस्तान को दुशमनों की नजरों से देखने की हिमाकत कर रहा है। लेकिन वो अहसान-फरामोश ये भूल रहा है कि उनके ही मुल्क में जिस हिन्दुस्तान ने पाकिस्तानी फौज को घूल चटाई थी अगर वो अपनी पर आ गया तो उन्हे धूल में भी मिला सकता है।

आतंकवाद के लिये हमारे मुल्क के हुक्मरान और सरकारे, न्याय प्रणाली जिम्मेदार रही है। जब-जब आंतकी घटनाए हुई तो हमारी सरकार प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री विदेशमंत्री वगैरा ने इसके लिये पाकिस्तान पर आरोप लगाये और पाकिस्तान ने बडी बेशर्मी के साथ बोल दिया कि वारदातों में उसका कोई हाथ नहीं है। सबूत होने का दावा करने के बावजूद हमारा देश पाकिस्तान पर लगाम नहीं कस पाया और पाकिस्तान की हरकते जारी रही। वो आई0एस0आई0 और आतंकियों के जरिये हमारे मुल्क में बदअमनी फेलाता रहा है। कोई भी वारदात होन पर हमारी सरकार ने अमरीका जैसे मुल्कों से फरियाद की कि वो पाकिस्तान पर दबाव बनाये उसके आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करे। 

क्या हिन्दुस्तान कार्यवाही करने के खुद समक्ष नहीं है ?

पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों के ठिकानों पर कोई कार्यवाही की जायेगी ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता है। हमारे देश में जो आतंकी पकडे गये, उनके खिलाफ भी कुछ नहीं किया गया।  अपने ही देश के वकील रुपयों की लालच में उनका केस लडते है, वो ही पूछताछ और अदालत की उबा देने वाली अंतहीन लम्बी कार्यवाही। जबकी कानून नहीं जानने वाली पंचायत में बैठे लोग ही थोडे ही धण्टों में मामले को निपटा सकते है। 

क्या देशद्रोही आतंकवादी को बचाने वाला भी दोषी नहीं है कुछ रुपयों की लालच में देश में आतंक फेलाने वाले की पैरवी कर बचाने का कई सालो तक उसे बचाने का भरपुर प्रयास करता है और आड लेता है कानून की !

हिन्दुस्तान के निर्दोष नागरिाकों को खून बहाने वाले आतंकियों को हर तरह की सुविधायें मुहैया कराई जाती है। ऐसे में क्या बाकी आतंकी हमारे देश में वारदात करते हुये डरेगे, उनमें खौफ होगा ?

काफी लम्बे समय बाद अगर कोई अदालत ने एक आतंकी को फांसी की सजा सुनाती है - लेकिन वोटो के खेल में उलझी सरकार ने उस आतंकी को अभी तक सरकारी मेहमान बनाया हुआ है। एसे में क्या उम्मीद की जा सकती है कि आगे आतंकियो को सख्त सजा मिल पायेगी।

ट्रायल के बाद आतंकी को तुरन्त गोली मार देनी चाहिये या तुरंत फांसी पर लटका देना चाहिये। उसका साथ देने वाले को भी उसी तरह की सजा दे देनी चाहिये।

ऐसा कानून होना चाहिये की पकडे गये आतंकियो को चन्द दिनों के भीतर ही मौत की सजा दे दी जाये। जेलो में आतंकी है ही क्यों ? उन्हे मौत की सजा क्यों नहीं दी गई ? नये कानून बनाकर आतंकियों को ऐसी सजा दी जा सकती है कि बाकी आतंकी कोई वारदात करते हुये धबराये। लेकिन सराकर ऐसा नहीं करेगी। उसे देश की नहीं वोटो की चिन्ता है। 

फुल पावर आथॅरिटी कानून बना कर सेना को दे देनी चाहिये वाह आतकिंयों और आई0एस0आई0 के लिये काम करने वालो को ढुंढ कर सभी देश के दुशमनों को चुन-चुनकर मार डाले। अगर कोई पकडा जाये तो हफ्ते-दस दिन में उससे जरुरी जानकारी लेकर सबूत के तौर पर उसके बयान की बीडियोग्राफी करा ली जाये और फिर उसको मौत की सजा दे दी जाये। इसी के साथ पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों और उनके आकाओं के खिलाफ भी कार्यवाही की जाये। भले ही इसके लिए पाकिस्तान से खुली जंग ही क्यों न लडनी पडे।

मेरा भारत महान्




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