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21 July 2015

एक राष्ट्रवादी योद्धा, जिसने अपने प्राणों की आहुती दे कर देश से खिलवाड करने वाले को सजा दी

कैसे संभव की पास में से तीन गोली लगने के बाद कोई  हे राम, हे राम, हे राम आैर मुझे मारने वाले को माफ कर दिया जाये यह बोल सकता है ?

जबकी सच्चाई यह है की गोली लगने के बाद गांधी के मुंह से  " आह " की आवाज निकली थी, जिसे सुनवाई कर रहे न्यायाधीश खोसले ने  व अन्य वहा मौजुद गवाहो ने भी स्वीकारा है।

कांग्रेस ने हेराल्ड अखबार के प्रचार से " हे राम " शब्द लिखवा,  देशवासियों को गुमराह किया एंव बाद में बच्चो को छोटी क्लास में पढाई की किताबों में पाठ के माध्यम से यह साइक्लोजी बैठ प्रचार करवाया।
यह सम्पूर्ण सच्चाई है।

जब गांधी ने मरने के पहले कहा था की मेरे मारने वाले को माफ कर दिया जाये।  
तो फिर जल्द बाजी में फांसी क्यों दी गई ?

राष्ट्र के साथ खिलवाड करने वाले , देश के टुकडे करने के बाद भी ,  देश की तुष्टी-करण की नीति  से ,  देश को असहाय बनाने के बाद , आगे के खेल से ,  देश को पंगु बनाने बनाने का अंजाम न दे सके .

नाथुराम ने अदालत में कहा मैने गांधी को गोली मारने में इतनी सावधानी , इतने पास से गोली इस लिए मारी की उनके बगल में दो युवतियां जो हमेशा उनके साथ रहती थी , उन्हे गोली के छर्रे लगने से मै बदनाम न हो जाउ।  .
( याद रहे, गांधी उन युवतियों के साथ नग्न सोकर ,  ब्रह्मचर्य / सत्य के प्रयोग में इस्तेमाल करते थे )

इस वध का उद्देश्य बताया  एंव नाथुराम जी ने कोर्ट से मंजुरी मांग कर 150 कारण  वध करने के बतलाये , उस समय अदालत में बैठे सुनवाई के लिए आये दर्शकों की आंखे आंसूआे से भरकर जमीन पर गिरकर नाथुराम का अभिनन्द कर रही थी।

150 कारण व कोर्ट कार्यवाही के सबुत जिसे आज तक हिन्दुस्तान की जनता के सामने नहीं आने दिया गया है चाहे  आर.एस.एस समर्थन से बनी बीजेपी सरकार रही हो।

एेसा क्यों ?

न्यायाधीश खोसला ने , अपने सेवा निर्वत्ती के बाद कहा था, यदि मुझे न्याय के लिए स्वतंत्र विचार दिया जाता तो मैं , नाथुराम गोडसे को निर्दोषी मानता , मै तो कानून का गुलाम था , इसलिए मुझे नाथुराम व उनके साथियों को मृत्यु दंड सुनाना पडा।

गांधी वध के पश्चात जब सावरकर जी को न्यायलय ने सम्मान बरी किया तो , जज का  वीर सावरकर के लिए यह वक्तव्य था ...
“ सावरकर ने अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया, लेकिन ऐसे तुच्छ कार्य में उन्हें घसीटना बहुत ही निंदनीय है, इस बात की जांच की जानी चाहिए की ऐसे महान व्यक्ति का नाम इस कार्य में क्यों घसीटा गया ”,  जबकी नाथुराम ने गांधी वध में सावरकरजी की संलिप्ता को नकार दिया था।

वीर सावरकर  क्रांतिकारी ने  13 मार्च 1910  मे जहाज से कूदकर , पानी मे अंग्रेज सैनिको की पीछे से गोलियो की बौछर का सामना करते हुए , फ्रांस के मार्सेल तट पर पहुँचे,  इस साहसिक घटना को जीवित कर , प्रेरित करने के लिए, घटना की 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य मे एक भव्य स्मारक बनाने के लिए भारत सरकार को सूचित किया , और भारत सरकार में मौजुद धर्मनिरपेक्षता के झूठे आडम्बर में फंसे  सेकुलरो ने   वीर सावरकर को देश्द्रोही कहकर आपत्ति की आैर वह प्रकल्प बंद करवा दिया। 

वह शांती का दूत ......... कपूत निकला , अंग्रेज भक्त निकला।
परन्तु आज सालो-साल इनके पुतलो को बिना नहलाए पूजते जा रहे है। गांधी जयंती के आयोजन में झूठे दिखावे के आचरण से देश को सरकारी अवकाश व विज्ञापनों व अन्य खर्चो से कई करोडो का चुना लगाया जा रहा है।
अनशन की खाल में गांधी  ने ..,
विश्व युद्ध में २ लाख हिंदुस्थानी सैनिकों की अकारण बलि देकर, जो कुत्ते की मौत मारे गए थे .. व १९४७ में देश का अंग भंग कर ५ लाख हिन्दुस्तानीयों की बलि लेकर...,  इस अहिसा के परदे में खूनी खेल खेलकर,  आज तक शांती दूत का चेहरा दिखाया जाता है... जो बडे शर्म की बात है।।

गांधी की गंदी राजनीति व नेहरु के जहर से देश बर्बाद हो गया है ।

आज सभी पार्टीया विदेशों में विदेशी हाथ मांगने जा रहे है , सत्ता के मद से भरा मदारियों का समूह 1947 से सत्ता परिवर्तन को आजादी के झांसे दिखला कर बन्दर बांट कर देश को लूट रहे है।

राजधर्म , जातिवाद , भाषावाद , अलगाववाद , धर्मवाद से राजनीति में गहरी पैठ से जनता को तडपा - तडपा कर मार रहे है।


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