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10 April 2015

सनातन धर्म

सनातन धर्म सनातन का अर्थ है - 

हमेशा बना रहने वाला अर्थात जिसका न आदि है न अन्त। सनातन धर्म हिन्दू धर्म का वास्तविक नाम है। 

सनातन धर्म जिसे हिन्दू धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहा जाता है का 1960853110 साल का इतिहास है। सिन्धु घाटी सभ्यता में हिन्दू धर्म के कई चिन्ह मिलते है।

हिन्दूत्व सनातन धर्म के रुप में सभी धर्मो का मूलाधार है क्योंकि सभी धर्म-सिद्धान्तों के सार्वभौम आध्यात्मिक सत्य के विभिन्न पहलुओं का इसमें पहले से ही समावेश कर लिया गया था। भारत के साहित्य में हिन्दू शब्द कोई 800 वर्ष पूर्व ही मिलता है उसके पहले नहीं।

प्राचीन काल में भारतीय सनातन धर्म में पांच सम्प्रदाय होते थे। 

गाणपतय ,  शैवदेवः कोटी वैष्णव,  शाक्त  और  सौर 

गाणपतय गणेश की, वैष्णव विष्णु की शैवदेवः कोटीशिव की और शाक्त शाक्ति और सूर्य की पूजा अराधना किया करते थे। पर यह मान्यता थी कि सब एक ही सत्य की व्याख्या है। यह न केवल ऋग्वेद परन्तु रामायण और महाभारत जैसे लोकप्रिय ग्रन्थों में भी स्पष्ट रुप से कहा गया है। प्रत्येक सम्प्रदाय के समर्थक अपने देवता को दूसरे सम्प्रदायों के देवता से बडा समझते थे और इस कारण से अनमें वैमनस्य बना रहता था। एकता बनाए रखने के उदेशय से धर्मगुरुओं ने लोगों को यह शिक्षा देना आरम्भ किया कि सभी देवता समान है, विष्णु, षिव और शक्ति आदि देवी-देवता परस्पर एक दूसरे के भी भक्त है। 

उनकी इन शिक्षाओं से तीनो सम्प्रदायों में मेल हुआ और सनातन धर्म की उत्पति हुई। 

सनातन धर्म में विष्णु, शिव और शक्ति को समान माना गया है। उनकी इन शिक्षाओं से तीनों सम्प्रदायों में मेल हुआ और सनातन धर्म की उत्पति हुई और तीनों ही सम्प्रदाय के समर्थक इस धर्म को मानने लगे। सनातन धर्म का सारा साहित्य वेद, पुराण, श्रुति, स्मृतियॉ, उपनिषद् , रामायण, महाभारत, गीता आदि संस्कृत भाषा में रचा गया है।

जब औपनिवेषिक ब्रिटिश शासन को ईसाई, मुस्लिम आदि धर्मो के मानने वालो का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए जनगणना करने की आवशयकता पडी तो सनातन शब्द से अपरिचित होने के कारण उन्होने यहा के धर्म का नाम सनातन धर्म के स्थान पर हिन्दू धर्म रख दिया।

सनातन धर्म की गुत्थियों को देखते हुए कई बार इसे कठिन और समझने में मुशकील धर्म समझा जाता है। हालाकि सच्चाई तो ऐसी नहीं है फिर भी इसके इतने आयाम इतने पहलू है कि लोगबाग कई बार इसे लेकर भ्रमित हो जाते है। सबसे बडा कारण इसका यह कि सनातन धर्म किसी एक दार्षनिक या ऋषि के विचारों की उपज नहीं है न ही यह किसी खास समय पैदा हुआ। यह तो अनादी काल से प्रवहमान और विसमान रहा साथ ही यह केवल एक द्रष्ठा, सिद्धान्त या तर्क को भी वरीयता नहीं देता।

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